लेखनी प्रतियोगिता -17-Dec-2021
प्यार..!
छोड़ गयी तुम मुझे आशा की किरण देकर,
लगा था मुझे आओगी मुड़कर।
क्यूँ गयी तुम बीच मझधार,
खेल अपना अधूरा छोड़कर।
राह देख रहा हूँ तुम्हारी आँखों में प्राण लाकर,
बैठा हुआ हूँ खाना पीना छोड़कर।
आँखें भर आयी है अश्रु से भरसक,
खुद को खो चुका हूँ पागल बनकर।
ख्वाब थे संजोये मन में सारे,
लेकिन वो भी खो चुका हूँ सारे।
राह देखते देखते जाऊँगा मर,
लेकिन तुम बैठी हो रास्ता रोक कर।
अभी भी मन में आस है,
तुम्हारा प्यार भरा अहसास अभी भी मेरे पास है।
समाप्त
©दत्ता ओतेक
Shrishti pandey
18-Dec-2021 09:22 AM
Wonderfull
Reply
Abhinav ji
18-Dec-2021 12:11 AM
Nice
Reply
Swati chourasia
17-Dec-2021 11:55 PM
Very beautiful 👌
Reply